Sunday, December 2, 2018
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पनामा पेपर्स लीक मामले में नया खुलासा, एयरटेल मालिक के बेटे और PVR सिनेमा मालिक समेत कई नाम आए सामने

नई दिल्ली। पनामा पेपर्स लीक मामले में नया खुलासा हुआ है। अप्रैल 2016 में पनामा पेपर्स के छपने के 3 हफ्ते पहले पनामा की लॉ फर्म मोसैक फोनसेका को किए गए ईमेल में कुछ भारतीयों के नाम सामने आए है। 2 साल बाद देश में एक बार फिर कालेधन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। आपको बता दे कि अप्रैल 2016 में पनामा पेपर्स के छपने के 3 हफ्ते पहले पनामा की लॉ फर्म मोसैक फोनसेका को किए गए ईमेल में कुछ भारतीयों के नाम सामने आए हैं।

बता दें कि इनमें पीवीआर सिनेमा के मालिक अजय बिजली, सुनील मित्‍तल के बेटे व हाइक मैसेंजर के सीईओ कवीन भारती मित्‍तल और एशियन पेंट्स के प्रवर्तक अश्विन धनी के बेटे जलज अश्विन धनी का नाम शामिल हैं। ये वे लोग हैं जिनकी विदेश में कंपनियां होने का पता चला है। मोसैक इनके लिए काम कर रही थी। इसके अलावा एशियन पेंट्स के प्रमोटर अश्विन दानी के बेटे जलज दानी के नाम भी दस्तावेजों में सामने आए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इंटरनेशनल कंसोर्श‍ियम ऑफ इन्वेस्ट‍िगेटिव जर्नलिस्ट ने 12 लाख से ज्यादा नए दस्तावेजों की जांच की है। इनमें से कम से कम 12,000 नए दस्तावेज भारतीयों से संबंधित हैं। दो साल पहले सामने आए मोस्साक फॉन्सेका के दस्तावेज में 500 भारतीयों का नाम था। पनामा पेपर्स सबसे पहले जर्मनी के अखबार स्यूज डोयचे जेइटुंग को मिले थे।

खबर के अनुसार, केंद्र सरकार ने एक मल्टी एजेंसी ग्रुप (MAG) बनाया है जो लिस्ट में शामिल 426 भारतीयों के बारे में जांच-पड़ताल कर रहा है। इस जांच के आधार पर करीब 1,000 करोड़ के काले धन का पता लगाया गया है।

क्या है पनामा पेपर्स मामला

पनामा पेपर्स मामला ने इंटरनेशनल मंच पर इसने तहलका मचा रखा है। इस मामले में पनामा पेपर्स के नाम से लीक हुए Documents में जो नाम आये है, उससे हगंमा मच गया है। इन दस्तावेजों में लगभग 500 भारतीयों के नाम भी है, जिसमें राजनीतिक हस्तियों से लेकर फिल्मी सितारे और खिलाड़ियों का भी अपराधिक चिट्ठा शामिल है।

पनामा एक देश है जो मध्य अमेरिका में स्थिति है जहां मोजैक फोंसेका नामक एक फर्म है जिसका काम के धन को सफेद करना है । गौरतलब है कि इस पनामा पेपर्स के पीछे कई पत्रकारों की अंतर्राष्ट्रीय संघ की टीम काम कर रही थी। पनामा पेपर्स इस तरह से काम करने वाला अपने आप में दुनिया का एक बड़ा संगठन है। इस खुलासे के पीछे पिछले एक वर्ष से करीब 80 देशों के 100 से अधिक मीडिया संगठनों के 400 पत्रकारों ने दस्तावेजों का गहन शोध किया है।

 

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